Mp News:शिप्रा नदी में नाले मिलने के विरोध में संतों का प्रदर्शन, आमरण अनशन की चेतावनी
Mp News:उज्जैन। शहर में शिप्रा नदी में मिल रहे नालों के विरोध में 13 अखाड़ों के संतों ने मिलकर जोरदार प्रदर्शन किया। संतों ने न केवल जिला प्रशासन से शिप्रा को शुद्ध करने की मांग की, बल्कि स्वयं नदी में उतरकर विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान संतों ने उज्जैन के विभिन्न घाटों का निरीक्षण किया और गहरी नाराजगी व्यक्त की। स्थानीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष संत रामेश्वर दास ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा इंदौर के नाले (कान्ह नदी) का डायवर्सन किया जा रहा है, लेकिन उज्जैन शहर के नाले अब भी शिप्रा में मिल रहे हैं।
Mp News:इस पर जिला प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। पीर योगी महंत महावीर नाथ महाराज ने कहा कि नालों के कारण शिप्रा का जल आचमन योग्य नहीं रह गया है। यदि प्रशासन ने जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं की तो संत आमरण अनशन पर बैठेंगे। संतों ने उज्जैन के लगभग 27 घाटों का निरीक्षण किया और ऋण मुक्तेश्वर घाट पहुंचे, जहां शिप्रा में मिल रहे नाले में उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द से जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
Mp News: यहां यह बता दे की मोक्षदायिनी शिप्रा में गंदे नालों का पानी मिलने की समस्या बहुत पुरानी है | शिप्रा में गंदे नालों का पानी मिलना राजनीतिक दलों के लिए चुनाव के दौरान एक अहम चुनावी मुद्दा बनता रहा है |चुनाव के पहले मां शिप्रा को स्वच्छ करने का दावा और वादा हर राजनीतिक दल द्वारा किया जाता रहा है | उसके पक्ष और विपक्ष में दलीलें दी जाती रही है ,लेकिन शिप्रा नदी में गंदे नालो और शहर की गटरों का पानी मिलने का सिलसिला बदस्तूर जारी है |
Mp News:एक पखवाड़े पहले ही प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव ने कान्ह डायवर्सन योजना की लगभग 640 करोड़ लागत की योजना का शुभारंभ किया था | कान्ह डायवर्सन योजना शिप्रा में मिलने वाली इंदौर के गंदे नाले जिसका नाम आगे चलकर कान्ह नदी हो गया के गंदे पानी को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है | साधु संतों का लंबे समय से इस बात को लेकर विरोध रहा है की शासन और प्रशासन स्तर पर शिप्रा नदी में गंदे नालों को रोकने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई है | बाहर से आने वाले श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान करते हैं जबकि नदी का पानी नालों के पानी मिल जाने के कारण मतमैला हो चुका है |कई घाटों पर तो शिप्रा नदी के ठहरे हुए पानी में बदबू आती है तो अक्सर गंदे पानी के कारण मछलियां एवं जल जीव तड़प तड़प कर अपनी जान दे देते हैं | शहर के समीप से बहने वाली शिप्रा नदी का पौराणिक महत्व भी है उत्तर वाहिनी शिप्रा आगे जाकर पूर्व वाहिनी हो गई है और इसका धार्मिक महत्व भी है |
Mp News:इसी धार्मिक महत्व के चलते शिप्रा नदी को बाबा महाकाल के साथ पूजा जाता है | व्रत तीज त्योहार पर शिप्रा के घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु इकट्ठा होकर स्नान करते हैं | यहां पर त्रिवेणी स्थित नवग्रह शनि मंदिर पर शनिश्चरी अमावस्या के नहान का महत्व है जबकि सोमवती अमावस्या पर रामघाट के समीप सोम घाट पर श्रद्धालु स्नान करते हैं | धार्मिक एवं पौराणिक महत्व की इस नदी में गंदे नालों का पानी मिलना श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करता है |आवश्यकता है शिप्रा नदी में मिल रहे गंदे नालों को रोकने के लिए एक सशक्त पहल की |